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Recent Articles

’रामचरित मानस एहि नामा’

तुलसी की कालजयी कृति रामचरित मानस पर एक दृष्टि

साहित्यकार की वाणी में ही, उसकी कृति में ही उसके अध्ययन को स्थान देना समीचीन होता है । उसी की वाणी को ही गौण स्थान दे दें तो किस प्रकार हम उसके भावों तक पहुँच सकते हैं ? तुलसी दास की कालजयी ’क्लासिक’ रचना ’रामचरितमानस’ को काव्यालोचन की जिस सामान्य तुला पर हम तौलते हैं, [...]

उद्धव शतक : जगन्नाथ दास रत्नाकर

आधुनिक काल में ब्रजभाषा का अन्यतम काव्य-ग्रंथ

यह नोल आधुनिक ब्रजभाषा काव्य के गौरव-ग्रंथ जगन्नाथ दास रत्नाकर विरचित उद्धव-शतक पर केन्द्रित है । इसमें इस महनीय काव्य-ग्रंथ का संक्षिप्त परिचय एवं उसकी विशेषतायें सहजतः लिख दी गयी हैं ।

कर्तार सिंह दुग्गल की पुस्तक ’कहानी कैसे बनी”

कहानी कैसे बनी पर एक दृष्टि

‘कहानी कैसे बनी’ पुस्तक की पहली रचना के नाम पर ही पुस्तक का नामकरण है । मैंने सुना था कि कहानी कैसे बनी दुग्गल जी की एक विशिष्ट कहानी है, पर इसको पढ़ने के बाद मैं इसे कहानी नहीं समझ पाया क्योंकि पहली ही दृष्टि में यह मुझे अपने रचनात्मक स्वरूप में बहुत कुछ नाट्य-रूप [...]

निराला की कविता ’शिवाजी का पत्र’ – एक पत्र-गीति

शिवाजी का पत्र पर एक दृष्टि

छायावादी कवियों की नवीन चेतना के प्रसार के परिणामस्वरूप छायावादी रूढ़ि विद्रोही नवीन युग बोध ने इन्हें समस्त रूढ़ि बन्धनों का तिरस्कार कर अपने भावों के संप्रेषण के लिये तथा विचारों के अनुकूल भिन्न-भिन्न प्रकार की नयी काव्य-विधाओं की रचना के लिये वाध्य कर दिया । यही कारण है कि छायावादी काव्य में काव्य-रूप गत [...]

नामवर सिंह को समझते हुए

नामवर जी के कृतित्व पर एक छोटा आलेख

“हिन्दी समीक्षा का सौभाग्य है कि श्री नामवर सिंह जी जैसी मनीषा उसकी मंजूषा की धरोहर है । Genius और Talent का एकत्र अद्भुत संयोग । विरल होता है ऐसा व्यक्तित्व। “Genius means a transcendent capacity for taking trouble”(Carlyle).और Meredith की माने तो “Genius does what it must and talent does what it can.” श्री [...]

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